
युद्ध की तेजी से बदलती हालात ने हमें अपने स्वयं के सक्रिय जवाबी उपायों को लगातार नए करने के लिए विवश किया। रूस-यूक्रेन संघर्ष , पीडीएफ बनाम म्यांमार सेना या तालिबान; सभी ने भविष्य में नई चुनौतियों का सामना करने के लिए जमीनी सैनिक को एक नए चुनौती दी। सीआई जे डब्ल्यू स्कूल न केवल भारतीय सेना बल्कि दुनिआ भर की सेनाओं को प्रतिविद्रोहिता और गुरिल्ला युद्ध में प्रशिक्षित करने के लिए तत्पर है। मिजोरम के जंगल प्रशिक्षुओं को यथार्थवादी वातावरण प्रदान करने के लिए सबसे उपयुक्त हैं। विभिन्न प्रकार की अभिनव फायरिंग रेंजों और काउंटर इंसर्जेंसी पर सुसंरचित पाठ्यक्रम के साथ, यह स्कूल 50 से अधिक देशों को लाभान्वित करने में सिद्ध हुआ है।
आधुनिक समय की युद्ध में नवीनतम तकनीकों का एकीकरण देखा गया है। हालाँकि, बढ़ती तकनीकी उन्नति रणनीति की मूल बातें, जैसा की ज़मीन बिहीन स्थानों पे जीवन संभव रखना, जंगल में स्वयं को सुरक्षित रखना , छोटी छोटी टीम में लड़ाई लड़ना, इत्यादि प्रतिस्थापित नहीं कर सकी। सीआई जे डब्ल्यू स्कूल अच्छी तरह से सुसज्जित बुनियादी ढांचे और नवीनतम तकनीकों के माध्यम से वर्तमान समय की चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए कम् तीव्रता संघर्ष और पारंपरिक संचालन (लीको) एवं प्री-इंडक्शन ट्रेनिंग (पीआई टी ) पर पाठ्यक्रम चलाता है, और सैनिकों को प्रशिक्षण देता है।
स्कूल विचार मंथन माध्यम से चर्चाओं, अतिथि व्याख्यानों और नियमित बातचीत के माध्यम से नए ज्ञान फिर से सीखने के लिए प्रेरित करना और दुनिया भर में विभिन्न संघर्षों पर शोध अध्ययन को भी बढ़ावा देता है। स्कूल उग्रवाद या आतंकवाद से प्रभावित राष्ट्रों को सही मार्गदर्शन प्रदान करने के लिए तैयार है।
जय हिन्द
मेजर जनरल राजीव थापर
कमांडेंट
सीआई जे डब्ल्यू स्कूल