उपकरण और स्टोर

भूमिका
इस संस्था की प्रमुख भूमिका सेना के लिए सभी किस्म के इक्वाइन (एम ए खच्चर, जी एस खच्चर, घोड़े एवं गधे) विभिन्न खेल स्पर्धाओं के लिए स्पोट्र्स घोड़े तथा सामान्य रुप से होने वाली कमी को पूरा करने के लिए अपने ब्रीडिंग स्टॉक के लिए घोड़ों का प्रजनन करना है। यह संस्था घोड़ों की चारे की मांग को पूरा करने के लिए सरस एवं पौष्टिक चारे की खेती करती है तथा सुपीरियर जर्म प्लाज्मा के प्रजनन के माध्यम से जेनेटिक सुधार द्वारा वैज्ञानिक विकास के लिए कार्य करती है।
इतिहास
इक्वाइन ब्रीडिंग स्टड, बाबूगढ़ की स्थापना 1811 में हापुड़ रिमाउंट डिपो के तौर पर की गई थी। 1901 में यू पी ब्रीडिंग एरिया, जिसका मुख्यालय बाबूगढ़ में था, की स्थापना कैप्टन बी जे हम्फरी द्वारा द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान की गई। सेना में पशुओं की मांग बढ़ने पर 1943 में एक रिजर्व रिमाउंट डिपो की स्थापना की गई।
1947 में देश का विभाजन होने पर अधिकतर स्थापित रिमाउंट डिपो, स्टड्स एवं ब्रीडिंग एरिया पाकिस्तान के अधिकार क्षेत्र में चले गए। इसके परिणामस्वरुप सेना के लिए खच्चरों, विशेषकर एम ए खच्चरों की भारी कमी हो गई तथा 01 सितम्बर 1948 को हापुड़ रिमाउंट डिपो का पुनर्नामकरण हॉर्स एंड म्यूल ब्रीडिंग एरिया बाबूगढ़ के रुप में कर दिया गया और यह भारतीय संघ का प्रथम इक्वाइन ब्रीडिंग संस्थान बना।घोड़ों की ब्रीडिंग के अलावा मई 1957 में माउंटेन आर्टिलरी के खच्चरों की ब्रीडिंग आरंभ की गई। बाद में जी एस खच्चरों एवं गधों की ब्रीडिंग भी आरंभ की गई। इसके बाद 1959 में इस यूनिट का पुनर्नामकरण इक्वाइन ब्रीडिंग स्टड, बाबूगढ़ के रुप में कर दिया गया।
ब्रीडिंग ऑपरेशनों की किस्में –
(क) हॉर्स ब्रीडिंग
(i) ब्रेड सेल्स के माध्यम से ब्रीडिंग
(ii) हनोवरियन सेल
(iii) ट्रूपर सेल
(iv) स्पोटर्स सेल( इवेंटर, ड्रेसेज, जम्पर एन्डयूरेंस, पोलो)
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स्टालियन अस्तबल
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(ख) घोड़ों (स्टालियन्स) एवं घोड़ियों की ब्रीडिंग
(i) हॉर्स ब्रीडिंग : हनोवरियन, अरबी, ग्रे हॉर्स, नारितक नस्लें
(ii) खच्चर ब्रीडिंग : नोरिकर, शीतरक्त यूरोपियन नस्लें
घोड़ो का अस्तबल :सबसे लंबा कॉरिडोर(191 मीटर)

(ग) गधों की ब्रीडिंग :फ्रेंच
हनोवरियन घोड़ों को विश्व भर में श्रेष्ठ स्पोर्टिंग घोड़ों के रुप मे जाना जाता है। इन्हें अच्छे शो जंपर्स एवं ड्रेसेज घोड़े माना गया है। 1997 में जर्मनी से 04 घोड़ों एवं 20 घोड़ियों का आयात किए जाने के परिणामस्वरुप ई बी एस बाबूगढ़ में हनोवरियन ब्रीड़िंग की जा रही है एवं इस ब्रीडिंग सेंटर ने इस नस्ल की प्योर ब्लड लाइन को बरकरार रखा है।
नोरिकर्स

नोरिकर घोड़े जिन्हें नोरिको पिंजगोर एवं काफी समय पहले पिंजगोर घोड़ो का नाम दिया गया था, मामूली रुप से भारी आस्ट्रियन ड्रॉट हॉर्स की नस्ल है। 2009 में विशेष तौर पर एम ए खच्चरों के प्रजनन के लिए ऑस्ट्रिया से 200 नोरिकर घोड़ियां एवं 02 नोरिकर घोड़े आयात किए गए।
इक्वाइन ब्रीडिंग के क्षेत्र में वैज्ञानिक प्रगति एवं हासिल की गई विशेष उपलब्धियाँ
ई बी एस बाबूगढ़ ने स्टड घोड़ियों में सुपीरियर जर्मप्लाज्म प्रजनन करने के लिए इक्वाइंस में ए आई (AI) के संबंध में एक अनूठा प्रोजेक्ट आरंभ किया है। इस स्टड ने न केवल ए आई तकनीक विकसित की है बल्कि देश में पहली बार संपूर्ण ए आई लैब स्थापित की है तथा यह इक्वाइन क्रॉस ब्रीडिंग प्रोग्राम के क्षेत्र में अग्रणी रहा है जो विश्व में एक अनूठी उपलब्धि है।
ब्रीडिंग संबंधी गतिविधियों की सफलता एवं पेशेवर दृष्टिकोण के कारण विज्ञान एवं तकनीकी मंत्रालय के जैव तकनीकी विभाग ने ई बी एस बाबूगढ़ को भारत में भ्रूण ट्रांसफर तकनीक (ई टी टी ) विकसित करने संबंधी प्रतिष्ठित प्रोजेक्ट प्रदान किया है। ई टी टी के माध्यम से पहले फोल (गौरव) का जन्म ई बी एस बाबूगढ़ में हुआ तथा इस संबंध में भारत ने सार्क (SAARC) देशों में पहला एवं विश्व में सातवें देश के रुप में अपना नाम दर्ज कराया है।
ई बी एस बाबूगढ़ ने इक्वाइन फर्टिलिटी सेंटर की स्थापना की है जो सभी किस्म की चिकित्सा सहायता प्रदत्त प्रजनन तकनीक संबंधी गतिविधियों को अंजाम देता है तथा अपनी तार्किक खोजों पर संबंधित अनुसंधान प्रोजेक्ट चलाता है। यह स्टड 2039 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है तथा यहां मौजूद सभी इक्वाइन की चारे संबंधी जरुरत की पूर्ति करता है। इस स्टड की आर्थिक कामयाबी यहाँ पैदा किए गए पौष्टिक चारे की मात्रा, किस्म एवं गुणवत्ता पर प्रत्यक्ष तौर पर निर्भर करती है। गुणतापरक चारे की पैदावार के लिए खेती प्रक्रिया का मशीनीकरण इस स्टड की खासियत है।
हनोवेरियन घोड़े