प्रशिक्षण सिद्धांत
"कोई भी सैनिक या अधिकारी युद्ध में कभी भी अपना जीवन या अंग इसलिए नहीं गवांए क्योंकि वह सैनिक अपर्याप्त रूप से प्रशिक्षित था। भारतीय सेना में प्रशिक्षण का यही सार है।"

किसी भी सेना में, हर सैनिक मायने रखता है । वह एक लीडर हो सकता है या एक टीम का हिस्सा हो सकता है जो युद्ध में है, युद्ध का समर्थन कर रहा है या विशेष/कुशल विशेषज्ञता प्रदान कर रहा है। इसलिए, प्रत्येक व्यक्ति, टीम और बड़े समूह (जैसे यूनिट्स / संगठन ) सेना के लिए अपनी भूमिकाओं को अदा करने के लिए बहुत महत्व रखता हैं। और यह केवल बुद्धिमतापूर्ण, कल्पनात्मक व नवोन्मेषी प्रशिक्षण है जो कुशल जवान/सैनिक, एकजुट यूनिट्स और संगठन का निर्माण करता है।
भारतीय सेना सैनिकों, लीडर्स, यूनिट्स और संगठन को युद्ध के पूरे फैलाव में लामबंद करने, तैनात करने, लड़ने और जीतने के लिए तैयार करती है। प्रशिक्षण युद्ध और शांति दोनों में अपनी सभी दृष्टात्मक और सौंपी गई भूमिकाओं और कार्यों को पूरा करने में सक्षम बनाता है।

भारतीय सेना के पास प्रचलित सामरिक और काउंटर इंसर्जेन्सी प्रतिबद्धताओं के साथ-साथ भविष्य के सभी प्रकार के संघर्षों की तैयारी के नियत कार्य है।
युद्ध के लिए सभी तैयारियों और प्रशिक्षण को भविष्य के संघर्ष के लिए प्रासंगिक होना चाहिए, न कि भूतकाल की । इसलिए प्रशिक्षण को आनेवाले समय, तकनीक युद्धक्षेत्र परिदृश्य, खतरे की समझ और आंतरिक सुरक्षा स्थिति को ध्यान में रखना चाहिए ।
भारतीय सेना के पास विविध, गहन और विविध सामरिक संबंधी जिम्मेदारियां हैं। सतत तकनीकी विकास के साथ संयुक्त रूप से भविष्य के युद्ध के मैदान में निरंतर परिवर्तन के कारण, हमारे समग्र प्रशिक्षण ढांचे को पुनर्गठन और सुव्यवस्थित करने की आवश्यकता महसूस की गई। इसका उद्देश्य हमारे प्रशिक्षण की प्रभावशीलता को बढ़ाना और अवधारणाओं और सिद्धांतों को तैयार करने के लिए एक समर्पित संगठन स्थापित करना था, जो कि विशेष रूप से हमारे सामरिक वातावरण पर प्रभावी हैं।
अवधारणाओं और सिद्धांत विकास, प्रशिक्षण नीतियों और संस्थागत प्रशिक्षण के सभी पहलुओं को पूरा करने के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे और संसाधनों के साथ एक केंद्रीकृत, स्वतंत्र और उच्चस्तरीय संगठन की स्थापना के द्वारा जरूरतों को पूरा किया जाना था। आर्मी ट्रेनिंग कमांड (ARTRAC) 01 अक्टूबर 1991 को मध्य प्रदेश के महू में अस्तित्व में आया। तत्पश्चात 31 मार्च 1993 को यह शिमला में स्थानांतरित हो गया।
भूमिका (रोल)
रणनीति,संचालन कला,युद्धनीति,संभार-तंत्र,प्रशिक्षण और मानव संसाधन विकास के क्षेत्र में युद्ध की अवधारणाओं और सिद्धांतों का निर्माण और प्रसार करना ।
सेना में सभी संस्थागत प्रशिक्षण के लिए केंद्र बिन्दू के रूप में कार्य करना।
अन्य सेवाओं के संयोजन के साथ संयुक्त सिद्धांत विकसित करना।
कर्त्तव्य सूचि (चार्टर ऑफ़ ड्यूटीज)
सामरिक, परिचालन और रणनीति सम्बन्धी स्तरों पर युद्ध के लिए मानकीकृत सिद्धांतों से युद्ध के लिए मानकीकृत सिद्धांतों का विकास और प्रसार करना ।
खुफिया, मनोवैज्ञानिक संचालन, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, प्रेरणा और प्रशिक्षण के क्षेत्रों के विशेष संदर्भ में सभी हथियारों और सेवाओं के सामरिक कार्यों के लिए पूरक अवधारणाओं का विकास करना ।
संबंधित प्रशिक्षण संस्थानों का प्रशिक्षण निरीक्षण/ऑडिट करना।
भारतीय सेना के निर्दिष्ट प्रशिक्षण प्रतिष्ठानों में प्रशिक्षण नीति की योजना, समन्वय, अगुआई और कार्यान्वयन और प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों का संचालन करना ।
अन्य सभी प्रशिक्षण प्रतिष्ठानों में प्रशिक्षण का पर्यवेक्षण और निगरानी।
विशेष प्रशिक्षण रिपोट और प्रशिक्षण निर्देश तैयार करना।
कंप्यूटर वॉरगेम और सिमुलेटर सहित उन्नत प्रशिक्षण सहायक सामग्री का विकास और पुनःस्थापना।
युद्धकला विकास।
संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना ऑपरेशन्स से संबंधित सैद्धांतिक और प्रशिक्षण पहलुओं के लिए नोडल एजेंसी।
वैचारिक स्तर पर अन्य सेवाओं के प्रशिक्षण कमांड के साथ सहभागिता।
प्रशिक्षण मैनुअल तैयार करना।
मानव संसाधन विकास के सभी पहलुओं में सेना स्तर के अभ्यास और वॉरगेम ।
भारतीय सेना संपर्क अधिकारियों का संचालन ।
कर्त्तव्य सूचि: स्पैशल आर्मी आर्डर 2007
भारतीय सेना और रिज़र्व सैन्य बलो में सभी प्रकार के प्रशिक्षण के सम्बन्ध में चीफ ऑफ़ आर्मी स्टाफ के प्रति जिम्मेदार।
सामरिक, रणनैतिक और युक्ति सम्बन्धी स्तरों पर युद्ध के लिए मानकीकृत सिद्धांतों का विकास और प्रसार करना ।
सेना में संस्थागत प्रशिक्षण के लिए नोडल एजेंसी ।
कैट ‘ए’ इस्टैब्लिशमेंट में प्रशिक्षण, कर्त्तव्य सूचि और पाठ्यक्रमों के संचालन सहित प्रशिक्षण नीति की योजना, समन्वय, पर्यवेक्षण और कार्यान्वयन करना ।
मानव संसाधन विकास के सिंद्धांत व दिशा निर्धारित करना ।
सेना मुख्यालय स्तर के अभ्यास और युद्धाभ्यास योजना बनाना व सञ्चालन करवाना ।
अन्य सेवाओं के ट्रेनिंग कमांड के साथ मिलाप रखना।
उन्नत सिधान्तो का सहयोग करने वाले हथियारों का विकास वे सेवा में शामिल करवाना।
प्रशिक्षण विकास के पहलुओं में अनुसंधान एवं विकास करना ।
उन्नत ट्रेनिंग प्रसाधन और सिम्युलेटर्स का विकास और परिचय करना ।
विभिन्न ऑपरेशन्स में सीखे गए पाठों का संग्रह, मिलान और प्रसार करना ।
सेना घटक प्रशिक्षण में डीएसएससी, एनडीए और सीडीएम की सहायता करना ।
अतिरिक्त कर्त्तव्य सूचि : डीजीएमटी (DGMT) के विलय के बाद
द्विवार्षिक सीओएएस (COAS) प्रशिक्षण निर्देश का मसौदा तैयार करना ।
प्रशिक्षण सलाहकार समूह की स्थापना करना ।
जी एस पेम्पलेट्स को तैयार करना, संशोधित करना, अपडेट करना, प्रिंट करना और वितरित करना ।
श्रेणी 'बी' संस्थानों में बेसिक मिलिट्री ट्रेनिंग के संबंध में नीति तैयार करना ।
अन्य सर्विसेज के साथ संयुक्त प्रशिक्षण के संबंध में नीति तैयार करना ।
पेशेवर सैन्य शिक्षा में गैर तकनिकि आर्म्स के लिए इंजीनियरिंग डिग्री के लिए अध्ययन अवकाश, एमटेक और चयन बोर्ड शामिल करना
पदोन्नति और प्रतियोगी परीक्षाओं का आयोजन करना ।
विश्वविद्यालयों, एनसीईआरटी, यूजीसी और यूपीएससी के संबंध में परीक्षा प्रवृत्तियों के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) और संबंध स्थापित करना ।
आरट्रेक व अन्य सैन्य संघटनो के तहत संस्थानों में बुनियादी ढांचा विकास और धुनिकीकरण परियोजनाओं में सहायता करना ।
हवाई/हेलीबोर्न प्रशिक्षण के लिए वायु सेना का समन्वय – योजना ।
फोर्मेशन्स की फिल्ड फायरिंग के लिए रेंज और रोलिंग स्टॉक उपलब्ध करना ।
सैन्य तकनीक संस्था (Mil Instt Tech) में सेना विशिष्ट पाठ्यक्रमों पर जीएस प्रतियोगिता का आयोजन करना ।
NDC, APPA, HC और समकक्ष् पाठ्यक्रम और DSSC/DSTSC के लिए फॉरवर्ड एरिया टूर (FATs) के संचालन का समन्वय करना ।
सीएडब्ल्यू (CAW) द्वारा चलाए जा रहे पाठ्यक्रमों में रिक्तियों का समन्वय करना ।
श्रेणी ए में सिविल कर्मचारियों के प्रशासनिक/व्यक्तिगत मामलों की देखरेख करना ।