स्कूल ऑफ आर्मर्ड वारफेयर (एस० ए० डब्ल्यू०)
विस्तृत इतिहास
1. पूर्ववर्ती यंग ऑफिसर्स (वाई ओ) विंग की स्थापना ०१ जून १९४८ को सीधे तौर पर मुख्यालय, कवचित कोर केन्द्र एवं स्कूल के तहत कार्य करने के लिए की गई थी, जिसके प्रथम कमान अधिकारी मेजर बलजीत सिंह, (8 वीं कैवलरी) रहे। विंग केवल आर्मड कोर में कार्यरत यंग ऑफिसर्स को सामरिक प्रशिक्षण देता है। १९५० में इसे टेक्टिकल विंग के रूप में फिर से नामित किया गया और लेफ्टिनेंट कर्नल आई डी बैंक्स इसके कमान अधिकारी बनाए गए। अगले कुछ समय में टेक्टिकल विंग द्वारा प्रदान किए जाने वाले प्रशिक्षण के दायरे को बढ़ाया गया ताकि स्क्वाड्रन कमांडरों और ट्रुप लीडरों के लिए सामरिक प्रशिक्षण को शामिल किया जा सके। इन वर्षों में इसे उत्तरोत्तर टेक्टिकल रेजीमेण्ट (१९७८) और टेक्टिकल ग्रुप (१९८५) के नाम से नामित किया गया।
2. मैकेनाइज्ड फोर्सेस के विस्तार के कारण, टैक्टिकल ट्रेनिंग ग्रुप को एक उन्नत चार्टर के साथ ०१ जनवरी १९८९ को डी० जी० आर्मड कोर स्तर पर आंतरिक रूप से “स्कूल ऑफ आर्मर्ड वारफेयर (एस० ए० डब्ल्यू०)” नाम दिया गया। एस० ए० डब्ल्यू० को ए० वी० एस० के रूप में प्रशिक्षण के लिए ‘ए’ और ‘बी’ व्हीकल भी आवंटित किए गए। स्कूल अक्तूबर २००९ में अपने नए स्थान पर स्थानांतरित हुआ और तब से यहीं कार्य कर रहा है।
3. स्कूल अधिकारी, जे० सी० ओ० और एन० सी० ओ० को संभावित ट्रूप लीडर्स और कॉम्बैट टीम/ कॉम्बैट ग्रुप कमांडर के रूप में प्रशिक्षित करने के लिए कई सामरिक कोर्स आयोजित करता है। मित्रवत विदेशी राष्ट्रों के कई छात्र भी इन कोर्सों में भाग लेते हैं।
भूमिका
4. मैकेनाइज्ड फोर्सेस के सैनिकों और अन्य कोरों के चुनिंदा सैनिकों को कॉम्बैट ग्रुप स्तर के लिए सामरिक प्रशिक्षण प्रदान करना और उन्हें सभी इलाक़ों, सभी युद्ध कार्यों और युद्ध के सभी आयामों में संयुक्त युद्ध के वातावरण में कुशलता से कार्य करने के लिए सशक्त बनाना।
कार्य क्षेत्र
5. प्राथमिक कार्य: -
(क) सामरिक एवं नेतृत्व की जिम्मेदारियाँ: - निम्नलिखित को सामरिक और नेतृत्व संबंधी प्रशिक्षण प्रदान करना: -
(अ) आर्मड कोर एवं मैकेनाइज्ड इनफेंटरी के यंग ऑफिसर
(आ) जे० सी० ओ० ट्रूप लीडर्स/ मैकेनाइज्ड इनफेंटरी प्लाटून कमांडर्स
(इ) एन० सी० ओ० आर्मर्ड फाइटिंग व्हीकल कमांडर्स और रैकी सेक्शन कमांडर्स
(ख) सामरिक प्रशिक्षण: - निम्नलिखित को मिश्रित वातावरण में सामरिक प्रशिक्षण प्रदान करना: -
(अ) टी० टी० सी० कोर्स कर रहे अधिकारी
(आ) कॉम्बैट टीम कमांडर्स और संभावित कॉम्बैट ग्रुप कमांडर्स
(इ) अन्य कोरों एवं सेवाओं के चुनिंदा अधिकारी
(ई) मित्रवत विदेशी राष्ट्रों के अधिकारी
6. अन्य कार्य: -
(क) अन्य स्कूलों और संस्ठाओं के लिए मशीनीकृत युद्ध से संबंधित विषयों पर व्याख्यान आयोजित करवाना।
(ख) फील्ड फार्मेशनों के द्वारा आयोजित प्रमुख प्रशिक्षण कार्यक्रमों में पर्यवेक्षक के रूप में सम्मिलित होना।
(ग) डैमो के भाग के रूप में डी एस एस सी/ डी एस टी एस सी के साथ ही आर्टिलरी, इंजीनियर, मैकेनाइज्ड इन्फेन्ट्री और आर्मड कोर के प्रशिक्षु अधिकारियों (वरिष्ठ अधिकारियों) के लिए मन्यूवर एक्सर्साइज़ करवाना।
(घ) यूनिवर्सिटी विंग का प्रबंधन।
कमान, नियंत्रण और संगठन:-
7. स्कूल में टैक्टिकल डीविजन भी शामिल है जो कि सी जी/सी टी/टी टी सी/वाय ओ’ज/टी सी सी सी/आर डब्ल्यू कोर्सों का आयोजन करता है। स्कूल का कार्यात्मक संगठन इस प्रकार है:-
विचार प्रक्रिया एवं अवधारणा:-
8 . प्रशिक्षण दर्शन . प्रशिक्षण यथार्थवादी है और नवीनतम ऑपरेशन वातावरण के साथ तालमेल बिठाता है। रणनीति पर प्रौद्योगिकी के प्रभाव को उचित महत्व दिया जाता है। नई पीढ़ी के उपकरणों (एन जी ई) में व्यावहारिक प्रशिक्षण पर ज़ोर दिया जाता है। कनिष्ठ, मध्यम स्तर और वरिष्ठ लीडर्स के प्रशिक्षण के लिए विस्तृत दृष्टिकोण रखा जाता है और अन्य प्रशिक्षण प्रतिष्ठानों के साथ प्रशिक्षण सामग्री के सामंजस्य को भी सुनिश्चित किया जाता है। सभी पाठ्यक्रमों विशेषकर वाय ओ’ज कोर्स के लिए सेना प्रशिक्षण कमान द्वारा जारी दिशा निर्देशों का पालन किया जा रहा है, प्रशिक्षण कार्यक्रम गतिशील है। प्रशिक्षण की प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए डिजिटल कनेक्टिविटी/ डिस्टेन्स लर्निंग पैकेज/थिन क्लाइंट्स का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया जा रहा है।
9. जमीनी हकीकत के साथ तालमेल:- मौजूदा ऑपरेशन प्रतिमान में युद्ध ने राष्ट्रों की सीमाओं को महत्वहीन बना दिया है, जिसमें अब ऑपरेशन की प्रकृति को अनिश्चित युद्ध स्थान (जैसे: साइबर, सूचना और आउटर स्पेस) के रूप में चित्रित किया जा रहा है और भौतिक और मनोवैज्ञानिक दोनों क्षेत्रों में ख़तरे उभर रहे हैं। ऑपरेशनों की प्रकृति पारंपरिक से उप-पारंपरिक और संकर हो गयी है। इसलिए वरिष्ठ अधिकारियों के लिए इस तरह के युद्ध से उत्पन्न होने वाले खतरों के स्तर और विभिन्न आयामों को समझना महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे वे इन खतरों का मुक़ाबला करने के लिए सभी गति और गैर-गति साधनों को नियोजित करने में सक्षम होंगे। इस पृष्ठभूमि को ध्यान में रखते हुए एस ए डब्ल्यू का उद्देश्य, दृष्टिकोण एवं अंतिम स्थिति इस प्रकार है:-
(क) उद्देश्य:- मशीनीकृत युद्ध में अपनी पेशेवर क्षमता के स्तर को बढ़ाने के लिए छात्र ऑफिसर्स (वरिष्ठ अधिकारियों) को अनुकूल मंच प्रदान करना।
(ख) दृष्टिकोण:- प्रभावी और कुशल ट्रुप/प्लाटून, कॉम्बैट टीम/ कॉम्बैट ग्रुप कमांडर के रूप में कार्य करने के लिए सभी इलाक़ों के साथ-साथ ऑपरेशन की विभिन्न स्थितियों में मिश्रित वातावरण के तहत मशीनीकृत युद्ध के संबंध में वरिष्ठ अधिकारियों में विश्वास पैदा करने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों को एक सक्षम वातावरण प्रदान करना।
(ग) अंतिम स्थिति:- काइनेटिक एवं आंशिक नॉन-काइनेटिक क्षेत्र में फील्ड फॉर्मेशन में होने वाले ऑपरेशन और ड्रिल के साथ अधिकारियों की वैचारिक समझ का ताल-मेल करने के लिए सर्वाधिक सक्षम मंच प्रदान करना ताकि पारंपरिक, उप-पारंपरिक एवं हाईब्रिड युद्ध में ऑपरेशनल समझ को बढ़ाया जा सके।
10. प्रशिक्षण की अवधारणा:- मैकेनाइज्ड फोर्सेस में एस ए डब्ल्यू एकमात्र संस्थान है जहाँ जूनियर लीडर्स के लिए सामरिक प्रशिक्षण संस्थागत रूप से आयोजित किया जाता है। हालांकि प्रत्येक जूनियर लीडर ने कई बार ऑन जॉब प्रशिक्षण प्राप्त किया है फिर भी यह उस फॉर्मेशन की ऑपरेशनल ड्रिल के नजरिये से होता है जिसमें मूल ड्रिल से एक अंतर्निहित भिन्नता होती है। इस प्रकार यहाँ ज़ोर छात्रों को थ्योरी और उसके हथियारों पर उपयोग के बारे में बार-बार पढ़ाये जाने वाले अभ्यासों के यथार्थवादी ढाँचे से अवगत कराने पर है। प्रशिक्षु यहाँ पर यूनिट के सभी प्रशासनिक दायित्वों से मुक्त रहते हैं और व्यावहारिक पहलुओं को यथार्थवादी तरीके से आत्मसात करने की मनःस्थिति में होते हैं। मुख्यालय आर्मी ट्रेनिंग कमान के निर्देशों, डी जी आर्मड कोर और कमाण्डेंट आर्मड कोर केंद्र एवं स्कूल के मार्गदर्शन के अनुरूप प्रशिक्षण की अवधारणा धीरे धीरे विकसित हुई है। वर्तमान युद्ध क्षेत्र परिदृश्य, भारतीय सेना के अनुकूलन, एक संभावित दोतरफा युद्ध और परमाणु पृष्ठभूमि ने प्रशिक्षण अवधारणा को काफी बदल दिया है। इस प्रकार प्रशिक्षण की अवधारणा उपरोक्त पर आधारित है एवं निम्नलिखित अनुच्छेदों मे शामिल है:-
(क) वैचारिक समझ एवं सामरिक निष्पादन :- यह सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित किया जाता है कि सी टी कमांडर/ युवा अधिकारी और टैंक ट्रुप, मैकेनाइज्ड इन्फैन्ट्री प्लाटून कमांडर, सामरिक स्तर पर और सी जी कमांडर सामरिक के साथ साथ ऑपरेशनल स्तर पर इस बारे में जागरूक हों कि किन तरीकों और माध्यमों से ऑपरेशन के दौरान माऊन्टिंग को सुनिश्चित किया जाए और निष्पादन की गतिशीलता को भी बरकरार रखा जाए। थ्योरी कक्षाओं से लेकर सैण्ड मॉडल डिस्कशन, आई टी सिस्टम पर सिमुलेटेड ट्रेनिंग, और आउटडोर एक्सर्साइज आदि का उत्कृष्ट तरीका एक छात्र को अवधारणा, अवधारणा से संबंधित ड्रिल और सामरिक ड्रिल के माध्यम से अवधारणा के निष्पादन को समझने में मदद करता है। अवधारणा की समझ महत्वपूर्ण है जिससे सामरिक अभ्यास का सही निष्पादन होगा। छात्र को यह भी महशूस करना होगा कि अवधारणा का तब तक कोई महत्व नहीं है जब तक कि इसे ठीक से निष्पादित न किया जाय। अवधारणा का सार इसके सही निष्पादन के साथ फलीभूत होगा।
(ख) प्राद्योगिकी द्वारा रणनीति:- वरिष्ठ अधिकारियों को आधुनिक युद्ध क्षेत्र (शारीरिक और मनोवैज्ञानिक दोनों) में रणनीति पर प्राद्योगिकी के प्रसार को समझने के लिए वातावरण दिया जाता है। सभी एस एम डी, एक्सर्साइज़ और वॉर गेम कई फोर्मेसन जैसे तृतीय आयाम (ए सी, ए एच, यू ए वी, ड्रोन और क्यू सी), एल आर वी, एन जी ई (सेन्सर एवं साइट्स), ई डब्ल्यू एवं सी2 आदि के पहलुओं के बारे में विचार करने के बाद निर्मित एवं निष्पादित किए जाते हैं। उद्देश्य यह है कि सभी कोरों जैसे उड्डयन, आर्टिलरी, ए ए डी , इंजीनियर और सिग्नल आदि से संबंधित सभी पहलुओं को बताया जाए और साथ ही नवीनतम ऑपरेशनल रसद अवधारणाओं (ई एम ई, ए एस सी, ए ओ सी और ए एम सी) को भी शामिल किया जाए।
(ग) परम्परागत बल का अपरंपरागत इस्तेमाल:- हाल ही में हमारी उत्तरी सीमाओं ने ख़तरे की धारणा के साथ साथ सार्वजनिक धारणा में भी प्राथमिकता प्राप्त की है, अर्थात डोकलाम संकट/गलवान संघर्ष और उरी/पुलवामा हमला। इसका तात्पर्य यह है कि एक ओर मैकेनाइज्ड फोर्सेस पूर्वी लद्दाख और/या उत्तरी सिक्किम के उच्च ऊँचाई वाले क्षेत्रों में अभियान चलाने के लिए तैयार है, तो दूसरी ओर वे किसी भी हाइब्रीड युद्ध के लिए २०१६ की सर्जिकल स्ट्राइक और २०१८ की एयर स्ट्राइक जैसी असमान प्रीतिक्रियाओं के माध्यम से जम्मू एवं कश्मीर में हमारे इरादों को व्यक्त करने में सक्षम है। इसलिए वरिष्ठ अधिकारियों को इस तथ्य से अवगत कराया जाता है कि मैकेनाइज्ड फोर्सेस, फील्ड कमांडरों को हमारे पारंपरिक कौशल का उपयोग करने के लिए एक वैकल्पिक प्रतिमान प्रदान करते हैं, जो वांछित परिणाम को प्राप्त करने का एक अपरंपरागत तरीका है।
(घ) निष्पादन में दक्षता और उत्कृष्टता:- यदि मशीन के पीछे का व्यक्ति उत्कृष्टता के स्तर को प्राप्त कर लेता है और ऑपरेशनल अवधारणा के पीछे का दिमाग कुशल है तभी उपरोक्त पहलुओं को निष्पादित किया जा सकता है। इसलिए टैंक ट्रुप/मैकेनाइज्ड इन्फेन्ट्री प्लाटून स्तर के प्रशिक्षण में यह सुनिश्चित किया जाता है कि वरिष्ठ अधिकारी बुनियादी अभ्यासों में उत्कृष्टता के स्तर को प्राप्त करें। इस से ऑपरेशनल प्लान के निर्दोष एवं कुशल निष्पादन में एक बलगुणक प्रभाव पड़ता है। हालांकि युद्ध की प्रकृति जटिल है, फिर भी सी जी और सी टी स्तर के वरिष्ठ अधिकारियों को हमेशा सिखाया जाता है कि उन्हें समय, स्थान और बल को ध्यान में रखते हुए कुशल योजना बनानी चाहिए।
(ङ) सीखने की उत्कृष्ट प्रक्रिया:- सभी कोर्सों में प्रशिक्षण देने के लिए एक प्रगतिशील पद्धति लागू की गयी है। उत्कृष्ट ढाँचे का उद्देश्य है छात्रों के प्रवेश स्तर का आंकलन करना, उन सभी को सामूहिक और शैक्षिक चर्चाओं के माध्यम से एक स्तर पर लाना इससे पहले कि वे आत्मसात करने के लिए व्यावहारिक प्रशिक्षण के उत्तरोत्तर उच्च स्तर की ओर बढ़ें। प्रशिक्षण का सत्यापन आउटडोर अभ्यासों, कंप्यूटर युक्त वॉर गेम और आत्मसात्करण एक्सर्साइज़ के माध्यम से किया जाता है।